हिचकी सालों बाद भी असर दिखाएगी – रानी मुखर्जी

रानी मुखर्जी बॉलीवुड के अलग ढंग की अभिनेत्री है। उन्होंने बहुत सारी फिल्में नहीं की है पर उनकी फिल्में बहुत परिणामकारक रही है। उन्होंने कम वक़्त में अपना जलवा दिखाया और उनकी फिल्मों का असर बहुत दूर तक प्रेक्षकवर्ग पर रहता है।

कुछ दिन पहले ही रानी मुखर्जी की फिल्म हिचकी प्रदर्शित हुई थी। हिचकी फिल्म एक प्रतिभावन्त अध्यापिका की कहानी है। इस फिल्म की प्रमुख नायिका, नैना माथुर, एक अध्यापिका है। उसे बचपन से ही ‘टुरेट सिंड्रोम’ है जिसके वजह से बोलते वक़्त उससे हिचकी जैसी आवाज़ निकल जाती है।

बचपन में घटी कुछ घटनाओंका असर नैना पर अब भी है। नैना किसी अच्छी पाठशाला में अध्यापिका की नौकरी पानेकी बहुत कोशिश करती है। अंत मे उन्हें एक पाठशाला में चुना जाता है जहां उन्हें ऐसी कक्षा को पढ़ाना होता है जो अभी तक किसी भी अध्यापक को बाज़ ना आये हो। बेलगाम और उत्शृंखल छात्रोंके अंदर भी प्रतिभा जगाने का नैना का प्रयास इस फिल्म में चित्रित हुआ है।

रानी मुखर्जी ने कहाँ की वे नैना से भावनिक तरफ से जुड़ पाई। वे कोई भी फिल्म करती है तब उनकी भूमिका से मानसिकतः जुड़ जाना उनके लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है तभी वे अच्छा अभिनय कर पाती है। उनके चाहनेवाले प्रेक्षक उन्हें बताते है के ब्लैक फिल्म का असर उनपर आज भी है। वे मानती है कि केवल भूमिका की भावनिक स्थिति से मिल जाने से यह होता है। तब ही वे इतना अच्छा अभिनय कर सकती है। इसी प्रकार की कोशिश उन्होंने हिचकी के लिए भी की थी। उनका मानना है कि अगर आप अपने किरदार में घुसकर अभिनय करते हो तो आपका अभिनय बहुत ही वास्तवदर्शी लगता है और प्रेक्षकवर्ग को भी पसंद आता है। उन्हें विश्वास है कि ऐसा ही अभिनय करनेका प्रयास उन्होंने किया है और अगर वह सफल रहा होगा तो लोग 13 साल बाद हिचकी को भी उतना ही पसंद करेंगे जितना कि वह आज ब्लैक को करते है।